एक दिन देश के एक अग्रणी चैनल पर दफ्तर से गुजरते नज़रे टिक गई...देखा तो होश उड़ गए...जो दिखाया जा रहा था वो बड़ा असहज है...अपने ही बिरादरी अपने ही जाति और अपने ही भाई बहनों के कपड़े उतारे जा रहे थे...दुर्भाग्य से उस समाज और उस बिरादरी का हिस्सा मै भी हूं...तकलीफ हुई...लेकिन फिर शांत हो गया क्योकि अचानक अमर सिंह का बाईट याद आ गया .....कौवा...कौवा का मांस खाता है....
Thursday, 7 July 2011
कौवा....कौवा का मांस खाता है..........
एक दिन देश के एक अग्रणी चैनल पर दफ्तर से गुजरते नज़रे टिक गई...देखा तो होश उड़ गए...जो दिखाया जा रहा था वो बड़ा असहज है...अपने ही बिरादरी अपने ही जाति और अपने ही भाई बहनों के कपड़े उतारे जा रहे थे...दुर्भाग्य से उस समाज और उस बिरादरी का हिस्सा मै भी हूं...तकलीफ हुई...लेकिन फिर शांत हो गया क्योकि अचानक अमर सिंह का बाईट याद आ गया .....कौवा...कौवा का मांस खाता है....
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