प्रकाश पीयूष

प्रकाश पीयूष

हमारी सोच

Wednesday, 29 December 2010

वाह भाई वाह....गुजरा 2010

भारतीय फिल्म और देश की राजनीति एक साथ चल रही है...फिल्म में रिमेक हो रहा है तो राजनीति में फेशसेभ...सेभ बोले तो चेहरे को बचाया जा रहा है...कौन बचा रहा है...आप भी जानते है...सरदार मनमोहन सिंह ने ओबामा को बुलाया...खुब नाम कमाया...रूसी प्रधानमंत्री आये तो भी नाम कमाया लेकिन...राजा ने ऐसा खेल किया कि मनमोहन चुप्प ही हो गये...क्या करते कॉग्रेस के बारे में उन्हे पहले से पता है...खाता कोई और है और भरता भी कोई और...आप देख लिजिए ना...शशी थरूर की मुहब्बत ने खाया...और भढ़ा थरूर ने...मंत्री पद गंवा दिया...


अब आप विपक्षी पार्टी एनडीए को देख लिजिए...पूरी साल कभी बाहरी तो कभी भीतरी लड़ाई में परेशान रहे...सरकार में रहकर सत्ता सुख की याद गयी नहीं...पार्टी को मजबूत बनाते रह गये...उमा जी को मनाया...यूपी बिहार नही...सिर्फ यूपी देने का वादा कर लिया...लेकिन उमा जी तो ऐसे बोली...की बोलती रह गयी...और पार्टी की पोल खोल दी...

इस साल तो लालू यादव को जोर का झटका धिरे से लगा...झटका ऐसा लगा कि बिहार से गायब ही हो गए...कहने लगे हार का राज पता चल गया है...लेकिन हार खाये महिनों हो गये है लेकिन अपना राज नहीं बता पाये...अब लालू जी को कौन समझाये...की बुढ़ापे में दिल का दर्द बाहर निकाल देना चाहिए...वैसे भी उम्र के साथ दिल तो कमजोर होने ही लगता है न...

इतने नेताओं की बात कर ली और बाबू अमर मुलायम को कैसे छोड़ दिया जाय...अमर सिंह तो आजकल अचानक गायब हो गये है...या फिर ये कह लिजिए कि ख़बर नहीं बन रहे है...इस साल कोई धमाका नहीं किया न फोन टेप हुआ और ना सीडी बनी...चलिए...हो सकता है आराम फरमा रहे हो...हां जब से धरतीपुत्र मुलायम सिंह ने आंजम को पार्टी मे लिया है...तब से भाई अमर खामोश हो गये है...क्या करेगे...पहले सोनिया का जुल्म सहा...अब मुलायम का सितम..

शरद जी की हालत तो हमेशा अच्छी रहती है...चाहे वो किसी कि सरकार हो या फिर कोई साल...दरअसल ग्रहों और नक्षत्रों की कृपा हमेशा बनी रहती है...भई बने भी क्यों नहीं...नवों ग्रहों का शरद पवार जी साथ में रखते जो है...बात अगर ग्रह नहीं बना पाये तो सरकार गिराने की धमकी तो साथ-साथ ही चलती है...चलिए शरद जी आपको धन्यवाद...धन्यवाद इसलिए कि महगाई आपने बढ़ा दी...ल्हासा में सुंदर घर बनवा लिया...देश चीन से कम चीनी और प्याज से ज्यादा परेशान हो गया...लेकिन पर कोई असर नहीं पड़ा...

अब आपही के प्रदेश महाराष्ट्र में आदर्श नाम की सोसाईटी बन गयी...तो आपके मित्र विलास राव को गद्दी छोडनी पड़ गयी....ऐसा बुरा क्या कर लिया...हंगामा बड़प गया...एकाध मकान तो ही अपने संबधियों के नाम की थी...लोग तो पूरी सोसाईटी ही अपने नाम कर लेते है...अगर ऐसा नहीं होता तो हमारा देश भ्रष्ट देशों की श्रेणी में 3 नंबर पे नहीं आता...अब तो गाने वाले गाते है....

ये देश है चोरो का

बेईमानों का

सुदखोरों का

इस देश को यारों हो...

इस देश को यारों क्या कहने...

Tuesday, 28 December 2010

जब छोटा था...तो राजनीति से नफरत थी...बड़ा हुआ रोजी रोटी का तलाश हुआ...जिन्दगी ने कई मोड़ दिखाये...तब के मेरे गुरू स्व। मनीष कुमार ने कहा था...जिस धंधे को तुम अपना कैरियर बना रहे हो उस धंधे के धंदेबाजों से पार पाना तुम्हारे लिए आसान नहीं होगा...तुम काम करोगे...करते जाओगे...मुंह बंद रखोगे...तुम्हारे मुंह में बाते डाल दी जायेगी...आज तुम्हारा वक्त है...कल का वक्त तुम्हारा नहीं होगा...भारी झंझावतों को पार करता पत्रकारिता के १५ साल पूरे कर लिए...यादे आयी चली गयी जो शेष रह गयी वो उन धंधेबाजों के साथ की रह गयी जो अपने लिए अपने आप के लिए किसी की जान ले सकते है...किसी कि रोटी पर हमला कर सकते है...
मिडिया...जहां दूसरों को रास्ता दिखाया जाता...दूसरों को अच्छे होने की नसीहत दि जाती...अगर यहां काम होता तो शायद आज के बदले समाज में हम कहीं और होते...वक्त बदला तो समाज बदला...समाज बदला तो राष्ट्र में क्रांति आयी...सूचना तकनीकि का जमाना आया...दुनियां कहां से कहां पहुंच गयी...लेकिन जिस कवि(पत्रकार) की कल्पना दिनकर ने की थी वो कवि रवि तक तो नहीं पहुंच पाया हां...गंदे फसल की ऐसी फेहरिस्त पैदा कर दी जिसका फसल आज हम काट रहे है...और आने वाली पीढ़ी भी काटेगी....हम राजनीति भी सिखने लगे है...लेकिन हमारे धंधे के धंधेबाजों ने राजनीति का नाम बदल दिया...पोलिटिक्स से डेपलोमेसी कर दिया...
हमारी सोच और हमारा लेख उन लोगों को समर्पित है जो मिडिया के दफ्तर में नेताओं पर गाली निकालते और खुद उस समाज को अपने बहसीपन का निशाना बनाते जो दिन रात उनके साथ रहता है...इनसे तो ये नेता अच्छे जो राजनीति करते खुल कर करते...अपने विरोधियों पर निशाना साधते लेकिन नाम नहीं छिपाते जो करते वो आमने सामने करते....

प्रकाश पीयूष

Monday, 27 December 2010


शून्य से शुरुआत करनी होगी
सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने बिहार में बहुत प्रचार किया था
बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के रूझानों के मुताबिक जनता दल यूनाइटेड और भाजपा के गठबंधन को भारी जीत मिली है जबकि बिहार में उत्तर प्रदेश की तरह चमत्कार की आस लगाए बैठी कांग्रेस पार्टी को करारा झटका लगा है.
पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बिहार की जीत के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई देते हुए कहा है कि वहाँ पार्टी को बहुत उम्मीद नहीं थी.
उन्होंने कहा, "चुनाव परिणामों से साफ़ है कि बिहार में पार्टी को शून्य से शुरुआत करनी होगी और हमारी योजना यही करने की है."
बिहार चुनाव के कांग्रेस प्रभारी मुकुल वासनिक ने दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि बिहार में अकेले चुनाव अपने दमखम पर लड़ने का फ़ैसला सोच-समझ कर लिया गया था.
जबकि कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन ने नीतीश कुमार को बधाई देते हुए कहा कि बिहार के मतदाताओं ने क़ानून व्यवस्था में हुई बेहतरी का फल उन्हें दिया है.
लगभग इसी तरह की प्रतिक्रिया गृहमंत्री पी चिदंबरम ने दी है और कहा है कि बिहार में विकास की जीत हुई है.
उन्होंने नीतीश कुमार को भविष्य में एक प्रगतिशील गठबंधन के लिए शुभकामनाएँ भी दी हैं.
'रास्ता लंबा हो सकता है'
मैं नहीं समझता कि बिहार में राहुल गाँधी का करिश्मा नहीं चला. राहुल के सभी चुनावी सभाओं में काफ़ी भीड़ उमड़ती रही. वे जनसभाओं में बेहद अच्छा बोले और निश्चित रूप से कार्यकर्ताओं में उन्होंने जोश भरा.लेकिन जहाँ तक चुनावी परिणाम का सवाल है, ये अलग मुद्दा हैं. इनका विश्लेषण अलग से किया जाएगा
मुकुल वासनिक
मुकुल वासनिक ने हार के लिए पूरी ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा कि जब बिहार में अकेले जाने का फ़ैसला किया गया तो पता था कि रास्ता लंबा हो सकता है.
उनहोंने कहा, "हमें अहसास था कि रास्ता लंबा हो सकता है आसानी से वहाँ पर जगह बनाना मुमकिन नहीं होगा, लेकिन हम उस रास्ते पर चल चुके हैं, आगे और भी मजबूती से उस पर प्रयास करते रहेंगे.
उनका कहना था कि राहुल गांधी की चुनावी रैलियां काफ़ी प्रभावशाली रहीं.
उन्होंने कहा, "मैं नहीं समझता कि बिहार में राहुल गाँधी का करिश्मा नहीं चला. राहुल के सभी चुनावी सभाओं में काफ़ी भीड़ उमड़ती रही. वे जनसभाओं में बेहद अच्छा बोले और निश्चित रूप से कार्यकर्ताओं में उन्होंने जोश भरा.लेकिन जहाँ तक चुनावी परिणाम का सवाल है, ये अलग मुद्दा हैं. इनका विश्लेषण अलग से किया जाएगा."
वासनिक का कहना था कि कोई भी संस्था एक सतत प्रक्रिया के तहत चलती है.
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि उन्हें देर से बिहार का प्रभारी बनाया गया.
उनका कहना था, "हम जो भी कर सकते थे हमने उसे अच्छी तरह से पूरा करने की कोशिश की।बिहार की राजनीति में हम अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। निश्चित रूप से हम इस बात का आकलन करेंगे कि क्या गलती हुई जिस वजह से हमें इस तरह के परिणाम मिले."
बीबीसी हिदी se